उत्कृष्ट पत्रकारिता हेतु डॉ मोहम्मद कामरान को मिला सर्वोच्च कृष्ण बिहारी रंग भारती सम्मान।

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🔴  रंगभारती सम्मान से सम्मानित हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मोहम्मद कामरान।

लखनऊ। रंगभारती संस्था द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. मोहम्मद कामरान को पत्रकारिता, सामाजिक सरोकारों और सांप्रदायिक सौहार्द के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित रंगभारती सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak, पूर्व मुख्य सचिव D. S. Mishra तथा न्यायमूर्ति Shekhar Kumar Yadav के करकमलों से प्रदान किया गया।

रंगभारती संस्था के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक श्याम कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाने की परंपरा संस्था ने वर्ष 1985 में शुरू की थी। पिछले 41 वर्षों से संस्था साहित्यकारों, पत्रकारों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करती आ रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता क्षेत्र में उनके 65 वर्षों के अनुभव के आधार पर प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान अपने आप में एक विशिष्ट उपलब्धि माना जाता है।

श्याम कुमार ने डॉ. मोहम्मद कामरान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे पिछले 35 वर्षों से पत्रकारिता के माध्यम से समाज और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाते रहे हैं। राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के रूप में उनके लेख देश के प्रमुख समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। अपनी निर्भीक लेखनी और स्पष्ट वक्तव्य शैली के कारण वे शासन-प्रशासन को जनसमस्याओं से अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

उन्होंने बताया कि डॉ. कामरान सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं तथा मीडिया कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए All India Newspaper Association (आईना) सहित विभिन्न मंचों के माध्यम से पिछले 22 वर्षों से निरंतर कार्य कर रहे हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए पीजीआई में निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, बीमा एवं आयुष्मान योजना जैसी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

सम्मान ग्रहण करने के बाद डॉ. मोहम्मद कामरान ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता अपने 200 वर्षों की यात्रा के बाद एक ऐसे दौर में पहुंच गई है, जहां डिजिटल और ऑनलाइन पत्रकारिता ने भाषा की मूल संरचना को प्रभावित किया है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंग्लिश के बढ़ते प्रभाव से हिंदी की शुद्ध शब्दावली, व्याकरण और अभिव्यक्ति शैली को चुनौती मिल रही है।

उन्होंने कहा कि टीआरपी की प्रतिस्पर्धा ने पत्रकारिता की कार्यशैली को भी बदल दिया है। वहीं, केंद्र और राज्य सरकारों की उदासीनता तथा आर्थिक संकट के कारण हिंदी समाचार पत्रों के समक्ष अस्तित्व का संकट उत्पन्न हो गया है। ऑनलाइन पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव ने भाषा, शैली और प्रस्तुति के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है, जो भविष्य में हिंदी पत्रकारिता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

डॉ. कामरान ने कहा कि ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन (आईना) हिंदी समाचार पत्रों के अस्तित्व और पत्रकारिता के मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1826 में कानपुर मूल के पत्रकार एवं हिंदी पत्रकारिता के अग्रदूत Jugal Kishore Shukla ने कोलकाता से हिंदी के प्रथम समाचार पत्र Udant Martand का प्रकाशन प्रारंभ किया था।

उन्होंने बताया कि लगभग 30 वर्ष पूर्व उन्होंने भी समाज को आईना दिखाने के उद्देश्य से लखनऊ से मात्र 500 प्रतियों के साथ एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया था। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदलने के बावजूद सच लिखने की चुनौतियां आज भी कम नहीं हुई हैं। इसके बावजूद पत्रकारों का दायित्व है कि वे समाज के सामने सच्चाई को निर्भीकता से प्रस्तुत करें।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. कामरान ने अपनी पत्रकारिता की प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हुए कहा—

"किसी के हक में, किसी के खिलाफ लिख दूंगा, मैं तो आईना हूं,

जो देखूंगा, जो समझूंगा, वह सब साफ-साफ लिख दूंगा।"

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