स्कूलों की मनमानी से आरटीई में घट रहे एडमिशन, कार्रवाई की मांग

                    🔴       🟡    आसिफ कुरैशी    🟡       🔴                   

कानपुर, 30 मार्च। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में स्कूलों द्वारा की जा रही अनियमितताओं और महंगी किताब-कॉपियों के बढ़ते बोझ को लेकर मुस्लिम वेलफेयर एंड एजुकेशनल संस्था की बैठक कर्नलगंज में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता संस्था के सचिव इखलाक अहमद डेविड ने की।


इखलाक अहमद डेविड ने कहा कि स्कूलों की मनमानी और गरीब अभिभावकों को बार-बार परेशान करने के कारण आरटीई के तहत ऑनलाइन आवेदन और प्रवेश की संख्या में कमी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता, जिससे पात्र अभिभावक जानकारी से वंचित रह जाते हैं।


उन्होंने बताया कि संस्तुति सूची जारी होने के बावजूद कई स्कूल अभिभावकों को यह कहकर टालते हैं कि सूची अभी प्राप्त नहीं हुई है। इसके अलावा, बार-बार दस्तावेजों की जांच के नाम पर अभिभावकों को चक्कर लगवाए जाते हैं, जिससे वे थककर प्रवेश प्रक्रिया छोड़ देते हैं। कुछ स्कूलों द्वारा एडमिशन फीस, परीक्षा शुल्क, यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए भी दबाव बनाया जाता है।

बैठक में यह भी कहा गया कि हर वर्ष किताबें बदलने की परंपरा से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। पहले पुरानी किताबें कम कीमत पर मिल जाती थीं, लेकिन अब यह संभव नहीं रह गया है।

संस्था ने 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र से पहले सरकारी स्कूलों में समय से किताबें उपलब्ध कराने तथा विशेष रूप से उर्दू की किताबें सुनिश्चित करने की मांग की।

बैठक में उपस्थित सभी वक्ताओं ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से आरटीई में अनियमितता करने वाले और महंगी किताबें बेचने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

बैठक में अफज़ाल अहमद, मोहम्मद उवैश, जमालुद्दीन फारुकी, परवेज आलम, सैफ अली, मुजम्मिल फारुकी, मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद राशिद आदि उपस्थित रहे।

🟥🟨 रिपोर्ट: आसिफ कुरैशी 🟨🟥

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