अयोध्या में ‘ग्रंथराज ज्ञानेश्वरी’ कथा का ऐतिहासिक समापन, महाराष्ट्र-अवध की भक्ति का अद्भुत संगम
🔴 🟡 रूपाली श्रीवास्तव 🟡 🔴
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अयोध्या। तीर्थ क्षेत्र पुरम में गुरुवार से प्रारंभ हुई ग्रंथराज श्री ज्ञानेश्वरी कथा का आज भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य समापन हो गया। कई दिनों तक चले इस आध्यात्मिक महोत्सव ने अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर होने का संदेश देते हुए हजारों श्रद्धालुओं के हृदय में नवचेतना का संचार किया।
महाराष्ट्र के तुंगेश्वर पर्वत से पधारे बाल योगी संत सदानंद महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से ज्ञानेश्वरी के अमृतमय संदेशों का रसपान कराया। उनके सानिध्य में अखंड पारायण और हरिनाम संकीर्तन से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर रहा। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ चंपत राय, महासचिव, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
आयोजन समिति की ओर से डॉ. ज्योति दीपक ठाकरे ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। यह महोत्सव बाल योगी श्री सदानंद महाराज ज्ञानेश्वरी पारायण समिति, अखिल वारकरी समाज महाराष्ट्र एवं परशुराम कुंड तुंगेश्वर पर्वत के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
महोत्सव के दौरान गोविंद देव गिरी महाराज ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और आदर्शों पर प्रेरक प्रवचन दिया। वहीं संत एकनाथ महाराज कृत भावार्थ रामायण का सारगर्भित वर्णन श्री योगी महाराज गोसिवी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति के गूढ़ संदेशों से अवगत कराया।
समापन अवसर पर विभिन्न संत-महंतों एवं वेदपाठी छात्राओं को महाराष्ट्र से आए भक्तों और आयोजकों द्वारा पट व स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समाजसेवी डॉ. सी. एच. दुबे ने पूरे आयोजन के दौरान चिकित्सीय सेवा उपलब्ध कराई, जबकि प्रमुख महेंद्र तिवारी ने व्यवस्थाओं की सतत निगरानी कर आयोजन को सुव्यवस्थित बनाए रखा।
अयोध्या की पावन धरा पर आयोजित यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, संगठन और समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। महाराष्ट्र और अवध की सांस्कृतिक एकता का यह अनुपम संगम लंबे समय तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में अंकित रहेगा।


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