करछना के फेरई धोबी ने बेच दी कोटवा के हजारीलाल बिन्द की जमीन।

                                     गणेश प्रसाद द्विवेदी                                   

👉 उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद नतीजा सीफर।

👉 उपनिबंधक कार्यालय की मिलीभगत का नतीजा।

👉 बैनामा में न तो पैनकार्ड और न फार्म 60 का उल्लेख।

👉 क्रेती की बदल दी जाति और मसविदाकर्ता भी नदारत।

हनुमानगंज, प्रयागराज। फर्जीवाड़ा रोकने के लिये सरकार भले ही लाख जतन करे लेकिन जिम्मेदार लोग चंद पैसों के लालच में अपनी लगाम ढीली कर दे तो नतीजा बदलने में देर नहीं लगेगी। ऐसा ही एक मामला तहसील फूलपुर के उपनिबंधक कार्यालय में माह भर पहले हुआ, जिसमें करछना तहसील के फेरई धोबी को कोटवा का हजारीलाल बनाकर सुदनीपुर कला की लाखों की जमीन का बैनामा एक महिला की जाति छिपाकर करा दिया गया। तमाम शिकायतों के बाद भी उच्चाधिकारियों की कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। 

        बता दे कि तहसील फूलपुर के सुदनीपुर कला की आराजी संख्या 1289 रकबा 0.0630 हे जो हजारीलाल बिन्द पुत्र सूरजदीन के नाम उद्धरण खतौनी में दर्ज है। कुछ माफिया और गिरोह बंद लोगों ने उपनिबंधक कार्यालय के लोगों को पैसों की लालच देकर एक बैनामा 25 जुलाई 2025 को करा लिया जिसमें हजारीलाल बिन्द के स्थान पर करछना तहसील के मझिगवा , अकोढा निवासी फेरई धोबी पुत्र बीकू को खड़ा किया गया। बैनामे में न तो विक्रेता के पैनकार्ड का उल्लेख है और न ही फार्म 60 का। इतना ही नहीं बैनामे में मसविदाकर्ता का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया है। आखिर उपनिबंधक कार्यालय के कर्मचारी अपनी आँखों में पट्टी बांधकर गरीबों की जमीनों पर क्यों डाका डाल रहे हैं। बैनामे में क्रेती को अनुसूचित जाति का बताया गया है जबकि क्रेती पिछडी जाति से ताल्लुक रखती है। मामले में भुक्तभोगी ने जिले के आला अधिकारियों को जरिये आईजीआरएस शिकायत की और  सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी शिकायत की किन्तु नतीजा सीफर ही है। कुछ जानकार लोगों ने बताया कि इस तहसील में फर्जीवाड़ा की यह कोई पहली घटना नही है इससे पहले भी 41 वीघे रेलवे की जमीन पर फर्जीवाड़ा हो चुका है। भूदान, बंजर व नाला आदि सरकारी जमीनों पर धडल्ले से हो रही प्लाटिंग भी इसी फर्जीवाड़े का परिणाम है।

      

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