हमीरपुर में यमुना-बेतवा नदियां खतरे के निशान से ऊपर
नागेंद्र पाण्डेय
👉 प्रशासन ने बनाए 36 बाढ़ चौकी और 28 शरण स्थल।
👉 दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में।
हमीरपुर : यमुना और बेतवा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिससे बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। दोनों नदियाँ खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं, और बांध से पानी छोड़ने के कारण स्थिति और भयावह हो गई है। प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है। नदी किनारे बसे गांवों में अधिकारियों ने डेरा डाल लिया है, और लगातार मुनादी कराकर लोगों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की जा रही है। वर्तमान में यमुना नदी: 104.75 मीटर और बेतवा नदी: 104.40 मीटर से दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जिससे जिले के निचले इलाकों और खासतौर पर मुख्यालय में जलभराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
हमीरपुर में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने 36 बाढ़ चौकियां और 28 शरण स्थल चिह्नित कर लिए हैं। पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र बल) की तैनाती की गई है। ताकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। शहर में पानी घुसने वाले मार्गों को पहले ही शील कर दिया गया है ताकि आपात स्थिति को रोका जा सके। एडीएम विजय शंकर तिवारी ने जानकारी दी कि जिले में बाढ़ से 183 गांव प्रभावित हो सकते हैं।जिसमें सदर तहसील के 90 गांव,मौदहा के 49 गांव,राठ के 20 गांव,सरीला सरीला के 24 गांव है। इनमें से यमुना और बेतवा नदी के किनारे बसे 34 गांव विशेष रूप से अत्यधिक प्रभावित हैं। 33 गांव सदर तहसील के हैं, जबकि 1 गांव सरीला क्षेत्र का है।
👉 ईंधन और राहत व्यवस्था पर भी प्रशासन का जोर
जिले में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए 68 पेट्रोल पंपों पर ईंधन का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है, ताकि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। प्रशासन ने बाढ़ संभावित गांवों में लाउडस्पीकरों के माध्यम से मुनादी शुरू कर दी है। ग्रामीणों से लगातार अपील की जा रही है कि वे अपना घर छोड़कर ऊंचाई वाले स्थानों की ओर जाएं। प्रशासन द्वारा बनाए गए शरण स्थलों पर रुके ।

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