हमीरपुर में शांति पूर्ण रूप से पूर्वजों को याद कर मनाया गया शबे-बारात का त्योहार

                        अजय कुमार गुप्ता हमीरपुर                     

 शब-ए-बारात, मुस्लिम समाज के लोगों का एक ऐसा त्योहार है, जिसमें लोगों को गुनाहों की माफी मिलती है। इस खास मौके पर लोग अल्लाह को राजी करते हैं।

मुस्लिम कैलेण्डर के मुताबिक शाबान माह की 14 तारीख को शब-ए-बरात का त्योहार मनाया जाता है । इबादत, तिलावत और सखावत (दान-पुण्य) के इस त्योहार के लिए मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की जाएगी। रात मनाए जाने वाले शब-ए-बरात के त्योहार पर कब्रिस्तानों में भीड़ का आलम रहेगा।पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम है। इस त्योहार पर तरह-तरह के स्वादिष्ट मिष्ठानों के साथ ही हलुआ पर दिलाई जाने वाली फातेहा के साथ मनाया जाता है।


मुस्लिम धर्मावलंबियों के प्रमुख पर्व शब-ए- बरात के मौके पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में शानदार सजावट होगी तथा जल्से का एहतेमाम किया जाएगा। रात्रि में मुस्लिम इलाकों में शब-ए-बरात की भरपूर रौनक होगी। शब-ए-बरात की रात शहर में कई स्थानों पर जलसों का आयोजन किया जाएगा।

इस्लामी मान्यता के मुताबिक शब-ए-बरात की सारी रात इबादत और तिलावत का दौर चलता है। साथ ही इस रात मुस्लिम धर्मावलंबी अपने उन परिजनों, जो दुनिया से रूखसत हो चुके हैं, की मगफिरत मोक्ष की दुआएँ करने के लिए कब्रिस्तान भी जाते हैं। इस रात दान का भी खास महत्व बताया गया है। हमीरपुर में नूरे शहीद, ईदगाह एवं सिटी फारेस्ट क़ब्रिस्तान पर पुलिस व प्रशासन का सुरक्षा के दृष्टिगत चौकस इंतजाम रहा तथा नगरपालिका परिषद हमीरपुर ने सफाई और चूना डालकर व्यवस्था की। सभी लोगों ने शांतिपूर्वक शबे-बारात का त्योहार मनाया।

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