सुमेरपुर में प्राइवेट खाद विक्रेता खुलेआम लूट रहे है किसानों को
👉 500 से लेकर 600 रुपया तक अवैध कमाई कर रहे है खाद विक्रेता।
ब्यूरो हमीरपुर अजय कुमार गुप्ता
सुमेरपुर/हमीरपुर, कस्बा सुमेरपुर सहित ग्रामीण क्षेत्र की सहकारी समितियों में डीएपी खाद की जहाँ मारामारी चल रही है वही प्राइवेट दुकानों में खाद विक्रेताओं द्वारा किसानो के साथ खुलेआम डकैती डाली जा रही है। 1350 रुपया में बिकने वाली खाद प्राइवेट दुकानदार 1800 से लेकर 1900 रुपया प्रति बोरी खुलेआम घड्डले से बेच रहे हैं। खाद विक्रेताओं की इस मनमानी को रोकने के लिये प्रशासन भी कोई कार्यवाही नही कर रहा है
सुमेरपुर,इंगोहटा,पचखुरा सहित ब्लाक की सहकारी समितियों में डीएपी खाद कम मात्रा में आने से खाद के किये मारामारी मची हुई है। हफ्ता - दो हफ्ता में अगर एकाध ट्रक खाद आ जाती है तो खाद लेने के लिये भारी भीड़ जमा हो जाती है और शाम तक इन्तजार करने के बाद भी खाद नहीं मिल पाती तमाम किसान बैरंग वापस लौट जाते है। इस समय गेहू की बुआई का समय जोरदारी ढंग से चल रहा है। समितियों में खाद न मिलने से किसान बुआई लेट होने की वजह से प्राइवेट खाद विक्रेताओं के यहाँ पहुंचता है तो पता चलता है कि 1350 रूपया बोरी मिलने वाली डीएपी 1800 से लेकर 1900 रुपया तक में' बेची जा रही है।इतने महंगे दामो में खाद बेचने वाले प्राइवेट खाद विक्रेता खुलेआम किसानों को लूट रहे हैं। किसानो ने बताया कि प्राइवेट खाद विक्रेता जब देखते है कि समितियों में खाद नही आ रही तभी मौके का फायदा जमकर उठा रहे है। किसानो का कहना है खाद की किल्लत गत वर्षों की तुलना इस वर्ष अधिक है। सूत्रों से पता चला है कि गत वर्ष खाद की मारामारी इसलिये अधिक नहीं थी क्योकी प्राइवेट खाद विक्रेता समिति के रेट से 50 या 100 रुपया बोरी की कमाई कर किसान को खाद दे देते थे किसान भी आसानी से प्राइवेट दुकानो से खाद उठा लेता था लेकिन इस वर्ष 500 से लेकर 600 रुपका प्रति बोरी का अन्तर होने से किसान परेशान है और समिति से ही खाद लेना चाहता है। किसानो का कहना है कि प्राइवेट खाद विक्रेता आखिर इतने महंगे दामो पर खाद कैसे बेच रहा है प्रशासन इस पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है। कुछ भी हो गरीब किसान इस मारामारी से बुरी तरह हताश है गेहूं की बुआई का समय भी धीरे-धीरे निकलता जा रहा है तमाम किसान भगवान भरोसे ही गेहूं की बुआई कर रहे है। किसानो ने जिलाधिकारी से मांग की है प्राइवेट खाद विक्रेताओं द्वारा की जा रही काला बाजारी पर रोक लगाई जाए और उचित दामों पर खाद दिलाई जाए।

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