एक महान संत और समाज सुधारक थे स्वामी रोटीराम

                  ब्यूरो हमीरपुर अजय कुमार गुप्ता                  

सुमेरपुर/हमीरपुर, जिनकी याद में कस्बा सुमेरपुर की गायत्री तपोभूमि में यज्ञ का बड़ा अनुष्ठान चल रहा है ऐसे संत का  संत स्वामी रोटीराम जी का नाम संत परंपरा में  बड़े सम्मान और श्रद्धा से लिया जाता है। उनका जीवन वीतरागी, तपस्वी और संन्यासी के रूप में अनुकरणीय रहा। स्वामी रोटीराम जी गायत्री उपासक थे और उन्होंने अपनी साधना, ज्ञान और कर्म से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश के सुमेरपुर कस्बे की गायत्री तपोभूमि में रहा, जहां से उन्होंने लोक-कल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाया।स्वामी रोटीराम जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। प्रारंभ से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर था। उन्होंने गृहस्थ जीवन में प्रवेश न कर संन्यास का मार्ग अपनाया और गायत्री उपासना में लीन हो गए। उनकी साधना इतनी गहन थी कि उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य जनकल्याण और धर्म के प्रचार-प्रसार को बनाया। स्वामी जी के जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय सुमेरपुर की तपोभूमि से जुड़ा है। यहां उन्होंने लोगों को गायत्री के महत्व और साधना के माध्यम से जीवन में सुधार के मार्ग दिखाए। स्वामी रोटीराम जी ने सुमेरपुर में कई बड़ी यज्ञों का आयोजन कराया। इन यज्ञों का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार और सामूहिक कल्याण था। उनका सबसे प्रसिद्ध यज्ञ सुमेरपुर की गायत्री तपोभूमि में हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इन यज्ञों के दौरान वे धर्मोपदेश देते और लोगों को सत्य, अहिंसा, सेवा, और नैतिकता का पालन करने की प्रेरणा देते थे। यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थे, बल्कि उनमें समाज सुधार का संदेश भी समाहित था। स्वामी जी ने  लोगों को धर्म संस्कृति के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। स्वामी रोटीराम जी ने यह समझा कि समाज के उत्थान के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुमेरपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। इन संस्थानों में न केवल आधुनिक शिक्षा दी जाती थी, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर भी जोर दिया जाता था। आज भी ये संस्थान उनके विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं। स्वामी रोटीराम जी की स्मृति में हर वर्ष सुमेरपुर की तपोभूमि में यज्ञ की वर्षगांठ मनाई जाती है।


यह आयोजन स्वामी जी के विचारों और उनके द्वारा किए गए कार्यों को स्मरण करने का माध्यम है। इस अवसर पर भव्य धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, प्रवचन और समाज सेवा के कार्य आयोजित किए जाते हैं। यज्ञ के इस महोत्सव में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और उनके जीवन को प्रेरणा के रूप में देखते हैं। स्वामी रोटीराम जी का जीवन साधना, सेवा और समाज सुधार का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी उपासना, उनके विचार, और उनके कार्य आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने जो बीज सुमेरपुर की तपोभूमि में बोए थे, वे आज एक वटवृक्ष के रूप में फल-फूल रहे हैं। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता की सेवा में लगा हो। स्वामी जी की स्मृति हमें हर वर्ष यह प्रेरणा देती है कि हम भी उनके पदचिह्नों पर चलकर समाज और राष्ट्र के कल्याण में योगदान दें।


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