राम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण
गणेश प्रसाद द्विवेदी / प्रयागराज
👉 सिकंदरा में राम वन गमन की लीला देखकर भावुक हुए दर्शक
बहरिया। सिकंदरा कस्बे में चल रही रामलीला के पंचम दिवस को राम वन गमन की लीला का सुंदर मंचन किया गया जिसको देखकर दर्शक भावुक हो गए। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी ने दर्पण में देखा की अब मेरा चौथा पन अगया है। तो उन्होंने कुलगुरु वसिष्ठ जी की आज्ञा एवं अपने मंत्रियों से सलाह लेकर पूरे नगर में ढिढोरा पिटवा दिया की कल राम जी का राज्याभिषेक होगा। यह जानकारी जब मंथरा को मिली तो उसने तुरंत महल में जाकर महारानी कैकेई को अपने दो वर मांगने के लिए कहा। मंथरा की बातों में आकर महारानी कैकेई कोपभवन में चली गईं। यह सूचना मिलने पर राजा दशरथ को बड़ा आश्चर्य हुआ। वह कोपभवन गए और महारानी कैकेई से उनके नाराजगी का कारण पूछा तो कैकेई ने दसरथ से अपने दो वर मांगे। पहले में भारत का राजतिलक और दूसरे वर में राम को चौदह वर्षो का वनवास।
दसरथ जी ने वरदान दिया और अचेत होकर वही गिर पड़े। मंत्री सुमंत ने बताया कि राम लक्ष्मण और सीता के साथ बन चले गए और वापस नहीं लौटे। महाराज दशरथ राम के विरहा में अपना प्राण त्याग दिया। पात्रों के कुशल मंचन को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए और सभी के नेत्र नम हो गए। मुख्य निर्देशक रामबचन सिंह(बेचन),सहायक निर्देशक कैलाश विश्वकर्मा, अनिल सिंह, अंकुर मिश्र अध्यक्ष रोहित पाण्डेय उर्फ पुनीत, प्रबंधक सूबेदार मेजर सुधीर मिश्र, जानी दूबे सरक्षक भूपेंद्र मिश्र, महेश मौर्या, कोषाध्यक्ष सुखागर मिश्रा आदि रहे।

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