भाजपा के निराश कार्यकर्ताओं में कब आएगा जोश
नागेंद्र प्रताप सिंह
सवाल तो पूछेंगे❓
👉 सत्ता में होने का एहसास नहीं कर पा रहा कार्यकर्ता!!
✍️ लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा का चुनाव सभी चुनाव में जीत की नींव रखने वाला भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता अभी भी निराशा से ऊपर नहीं उठ पा रहा है। लोकसभा का चुनाव निराशा के चलते ही आशा के विपरीत रहे। जो नतीजे आए उसके बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम बार-बार कर रहा हैं। फिर भी 2014 और 2017 में जो जोश कार्यकर्ताओं में था वो नजर नहीं आ रहा। अभी भी पुलिस थाना हो या फिर तहसील व ब्लॉक हर जगह कार्यकर्ता ना तो पीडतों का काम करा पा रहा है और ना ही खुद का। पिछला जो इतिहास रहा उसमें कई ऐसे कार्यकर्ता पार्टी के थे जिन्हें पुलिस द्वारा अपमानित किया गया, ऐसे पुलिस कर्मियों का कुछ भी नहीं बिगड़ा लेकिन भाजपा का बहुत कुछ बिगड़ गया जो अभी भी सुधारा नहीं जा सका है।
2023 और 2024 के बीच का समय देखे तो भाजपा कार्यकर्ता सत्ता में होने का एहसास नहीं कर सका और जिसने एहसास भी किया उसे मुंह की खानी पड़ी। खाओ खिलाओ वाला कार्यकर्ता या किसी दूसरी पार्टी से आया कार्यकर्ता तो अपना काम कराने में कामयाब होता रहा लेकिन मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं को एक नहीं बल्कि कई बार अपमानित होना पड़ा। अब हम यहां कुछ ऐसे उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं इससे साफ हो जाएगा की कार्यकर्ताओं में निराशा क्यों आई। 2023 में अल्लीपुर मंडल उपाध्यक्ष और प्रधान पति संतोष सिंह को सुल्तानपुर घोष पुलिस ने केवल इस बात को लेकर सार्वजनिक पिटाई कर दी क्योंकि वह गांव के ही दो पक्षों में हुए विवाद को लेकर थाने आया था। कई दिनों तक पुलिस की पिटाई से दुखी संतोष सिंह बड़े नेताओं से अपने अपमान को लेकर शिकायत करता रहा लेकिन कुछ नहीं हुआ केवल निराशा ही हाथ लगी।
भाजपा कार्यकर्ताओं में छाई निराशा की बात करें तो शहर क्षेत्र के राधा नगर निवासी अंकुर त्रिवेदी भी है। अंकुश त्रिवेदी जिला कार्य समिति के सदस्य और मौजूदा नगर मंत्री भी है इन्हें राधानगर पुलिस ने सार्वजनिक अपमानित किया अपमानित ही नहीं किया बल्कि इनको पीटा भी । जिले के नेताओं के सामने दरोगा द्वारा की गई पिटाई की बात बताने के बाद भी वह दरोगा दबंगई के साथ अपनी नौकरी को अंजाम देता रहा। पीड़ित कार्यकर्ता को न्याय नहीं मिला केवल निराशा ही हाथ लगी।
हम यहां एक और उदाहरण देना चाह रहे हैं जिसमें छिवलहा मंडल अध्यक्ष रामू बाजपेई पूरी कमेटी सहित इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी यूं कहें कि इस्तीफा का पत्र भी संबंधित नेताओं के पास भेज दिया था। वे भी किसी न किसी बात को लेकर अपने आप को अपमानित महसूस किया था।
सवाल तो प्रदेश में बैठे भाजपा नेता से पूछना चाहिए कि जो कार्यकर्ता भाजपा की नीतियों को गांव में बैठे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के साथ-साथ उन्हें समझाने की कोशिश करता है तो फिर ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व उनका साथ क्यों नहीं देता। क्या ऐसा कार्य करता केवल पार्टी का प्रचार प्रसार करने के साथ अपमानित होने का ही हकदार है।
✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब ✍️

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