भारत के पाठ्यक्रमों में कम से कम हाई स्कूल स्तर तक भारतीय जीवन पद्धति को भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप छात्रों के शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए

                             आर0 के0 अग्रवाल                            

भारत के पाठ्यक्रमों में कम से कम हाई स्कूल स्तर तक भारतीय जीवन पद्धति को भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप छात्रों के शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए जैसे ब्रह्म मुहूर्त में उठना, सो कर उठते समय बिस्तर पर बैठना पृथ्वी का स्पर्श फिर बिस्तर छोड़ने, बैठकर लघु शंका, बैठकर उषा पान, दैनिक क्रिया से निवृत होने की प्रक्रिया, योग, आसन, कसरत, प्रातः कालीन भ्रमण, आध्यात्मिक ज्ञान साधना प्रार्थना, देश विदेश के समाचारों को पढ़ना लिखना समझना, प्रातः का स्वल्पाहार, समय एवं मौसम के अनुसार आहार का चयन, अध्ययन की पद्धति, भाषा ज्ञान एवं शिक्षा का उद्देश्य किसी दूसरे की बात एवं विषय को सुना समझना और अपनी बात को दूसरे तक बोलकर आवश्यकता अनुसार संकेतों से समझने और समझना, उसके मनोभावों के अनुरूप संचारित अर्थात कम्युनिकेट करना, लोक व्यवहार एवं बड़े अथवा छोटे परिवार जनों के साथ सम व्यवहार, अन्य रिश्तेदारों पारिवारिक मित्रों, कर्मचारियों, गुरुजनों, ज्ञानीयो, संतो, समाज सुधारको, जन प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, सेवको, व्यापारियों, सेवा प्रदाताओं अन्य जन समुदाय परिचित अपरिचितों से विनम्रता पूर्वक साहस के साथ या तो यथोचित व्यवहार एवं वार्ता संप्रेषण की पद्धति, जीवन जीने की संपूर्ण कल के साथ-साथ आयुर्वेद सामान्य चिकित्सा पद्धति और विषम परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखने हेतु संघर्ष की क्षमता के साथ सामान्य अस्त्र-शस्त्र संचालन को भी शामिल किया जाए जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा का संवहन पीढ़ी दर पीढ़ी पुस्तक पलवित होकर समाज को उचित दिशा प्रदान कर सके और देश सर्वोत्तम उन्नत की ओर अग्रसर होता रहे। 


                सुझाव कर्ता राजीव कुमार अग्रवाल               

                            वरिष्ठ अधिवक्ता      

           31/64 सिविल लाइंस फतेहपुर उत्तर प्रदेश           

Comments

Popular posts from this blog

राजकीय आईटीआई पांडु नगर में 8 अक्टूबर को लगेगा एकदिवसीय अप्रेंटिसशिप रोजगार मेला

ईएसआई चिकित्सालय आजाद नगर की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को हटाने की मांग

प्रदेशव्यापी धरना प्रदर्शन का असर, पेंशन दिवस पर वित्त मंत्री करेंगे पेंशनर्स से संवाद