वृक्षारोपण महज एक औपचारिकता या फिर पर्यावरण के लिये वास्तविक संजीदगी ?

                           हरीश शुक्ल / फतेहपुर                             

  कहां चले जाते हैं हर साल रोपित होने वाले करोड़ों पौधे  ? 

पौध लगाकर कर देते  हैं इतिश्री, नहीं होती उसकी देखभाल 

 👉 "पीडीए-पौधारोपण" के जरिए "जन-जन" तक "पैठ" बनाने की "जुगत" में "सपा"

👉पेड़ों की अंधाधुंध कटान ने बढाई मुसीबत,हर साल निर्धारित होता लक्ष्य पर दिखती नहीं हरियाली! 

👉5 वर्षों में  लगे डेढ़ करोड़ से अधिक पौधे, जिले में ढूंढे नहीं मिल रहे लगाए गए पौधे!

👉01से 07 जुलाई के बीच 48 लाख पौधे लगाने का फिर निर्धारित हुआ लक्ष्य! 

👉प्राण वायु को लेकर संवेदनशील नहीं है आमजन, पौधारोपण की फर्ज अदायगी ने बढ़ाई समस्या! 

👉जल संचयन एवं पर्यावरण को लेकर संवेदनशीलता न बरती गई तो होगी भयावह स्थित!

👉कागजी खानापूरी का आदी हो गया है सरकारी मोहकमा, विभिन्न संगठनों का लक्ष्य भी फोटो सेशन तक ही हुआ सीमित! 

👉सपा पीडीए पौधारोपण के जरिए राष्ट्रव्यापी जनांदोलन बनाने की जुगत में!

👉लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद बुलंद हौसले के साथ 2027 सपा के निशाने पर !

     ✍🏿  पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटान,बढ़ते वायु प्रदूषण,गिरते जल स्तर एवं प्रदेश में पौधारोपण पर उठने वाले सवालों के बीच अब समाजवादी पार्टी ने प्रदेश व्यापी 'पीडीए-पेड़' वृक्षारोपण करने का बीड़ा उठाया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर शुरू होने वाला पीडीए पौधरोपण 07 जुलाई तक पूरे प्रदेश में वृहद पैमाने पर चलाया जाएगा। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली शानदार सफलता के बाद पीडीए फार्मूले को अब गांव स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने की समाजवादी पार्टी की नई कोशिश होगी।प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने पौधारोपण को लेकर पत्र जारी कर दिया है और कहा है कि पर्यावरणिक-सामाजिक आंदोलन को गांव स्तर पर शुरू कर राष्ट्रीय आंदोलन बनाने का सपा प्रयास करेगी।

     कोरोना काल में भले ही प्राण वायु को लेकर भयावह स्थिति देखी गई हो लेकिन उसके बाद भी लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण एवं जल संचयन को लेकर जागरूकता अभी बाकी है।अंधाधुंध पेड़ों की कटान से पर्यावरण असंतुलित है और इसी का नतीजा है की असमय जाड़ा, गर्मी, बरसात, अतिवृष्ट, ओलावृष्टि से लोग जूझ रहे हैं। बावजूद इसके इन सब परेशानियों के चलते भी आमजन पर्यावरण एवं जल संचयन को लेकर न तो गंभीर है और न ही संवेदनशीलता बरत रहा है।सरकारी से लेकर सामाजिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदम केवल कागजी एवं फोटो सेशन तक सीमित हो गए हैं।नतीजा है कि जनपद ही नहीं पूरा देश पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। फतेहपुर जिले में हर साल लाखों पेड़ लगाए जाते हैं।गत 05 वर्षों पर अगर निगाह डाली जाए तो जनपद में डेढ़ करोड़ से भी अधिक का पौधारोपण हुआ।इस बार पुनः लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है।01से 07 जुलाई तक अभियान चलाकर वन विभाग सहित 27 विभागों के माध्यम से 48 लाख 11हजार 2 सौ 60 पौधे रोपे जाएंगे।पर सवाल यह उठता है कि जब हर साल पौधारोपण होता है तो फिर ये पौधे जाते कहां हैं? विभागों सहित निश्चित स्थानों पर होने वाले पौधारोपण के पेड़ हर साल गायब हो जाते हैं और अगले साल लक्ष्य निर्धारित कर दिया जाता है।निश्चित क्षेत्रफल में हर वर्ष होने वाला पौधारोपण कागजी खानपूरी तक सीमित रहता है और इसी का नतीजा है कि जिस पर्यावरण को बचाने के लिए पौधरोपण पर जोर दिया जा रहा है वह हरियाली कहीं दिखाई क्यों नहीं पड़ती ?

    बात केवल जिले की ही नहीं उत्तर प्रदेश वह प्रदेश है जिसने विश्व रिकॉर्ड पौधारोपण में योगी सरकार ने कायम किया है लेकिन प्रदेश की भी दुर्दशा किसी से भी छिपी नहीं है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में पीडीए फार्मूले पर शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी पीडीए फार्मूले को आमजन तक बड़े पैमाने पर पहुंचाने की कोशिश में है।इसी का नतीजा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्म दिन के अवसर पर गांव स्तर पर पीडीए पेड़ लगाने की कवायद शुरू की गई है। यह अभियान 07 जुलाई तक चलेगा और बाद में समाजवादी पार्टी इसे राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाने का प्रयास करेगी। हो कुछ भी लेकिन जिस तरह से बढ़ते प्रदूषण,गिरते भू-जल स्तर को लेकर आम जनमानस में उदासीनता है उससे किसी का भी भला होने वाला नहीं है। जरूरत केवल कागजी खानापूरी कर आंकड़े प्रस्तुत करने की नहीं है बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा एवं जल संचयन को लेकर हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी एवं कर्तव्यों का पूरी निष्ठा,ईमानदारी के साथ निर्वाहन करना होगा।तभी भविष्य की मुसीबत एवं भावी पीढ़ी को पर्यावरण के संकट से बचाया जा सकेगा।

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