"गौशालाओं" में "हीट-वेव" से "तिल-तिल" मर रहे "गौवंश"

                           हरीश शुक्ल / फतेहपुर                           

👉हर साल होता पौधरोपण लेकिन गौशालाओं में नजर नहीं आ रहे एक भी पौधे!

👉अधिकांश गौशालाओं में खुले आसमान में भीषण गर्मी झेल रहे गौवंश! 

👉गाय पर राजनीति करने वाली भाजपा व हिंदूवादी संगठनों ने गायों की दुर्गति पर साधी चुप्पी!

👉शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल,सीएम के आदेश भी हवा-हवाई!

 भारत वर्ष अकेला ऐसा देश है जहां गाय की पूजा मां के रूप में होती है।गौवंशों के संरक्षण,सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर भारतीय जनता पार्टी सहित हिंदूवादी संगठन आए दिन हो-हल्ला मचाते हैं पर सवाल यह उठता है कि जिस गाय को लेकर राजनीति की सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़कर भाजपा ने अपना परचम लहराया क्या उन गौवंशो की हो रही दुर्दशा को लेकर भाजपा कभी गंभीर हुई है ? चिलचिलाती धूप में गौशालाओं में गौवंश तिल-तिल मर रहे हैं।भीषण गर्मी में छाया का अभाव होने के चलते गौवंशों की जो दुर्दशा है उसे देखकर किसी का भी कलेजा फट सकता है लेकिन गाय पर राजनीति करने वाले फिलहाल लोकसभा चुनाव में अयोध्या की हार के बाद नए प्रोपेगेंडा में लग गए हैं।शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी बड़े सवाल हैं ? एक बार फिर बरसात के मौसम में ब्यापक पौधरोपण को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी है। 2017 में भारतीय जनता पार्टी की बनी सरकार के बाद गौवंशों की व्यवस्थाओं को लेकर दावे बड़े किए गए लेकिन आज हिंदुओं में पूजित गौमाता की जो दुर्दशा है वह गांव से लेकर के शहर और गौशालाओं से लेकर कूड़ेदान तक देखी जा सकती है।भोजन की तलाश में कचरा खाने वाले गौवंशों की दुर्गति पर कोई आवाज उठाने वाला नहीं है।हर साल होने वाले पौधरोपण के बावजूद 7 साल का समय गुजर गया लेकिन गौशालाओं में पौधारोपण कर पौधों की परवरिश तक नहीं की जा सकी।इसी का नतीजा है कि अधिकांश गौशालाएं खुले में हैं और जब लोगों को घरों से निकलने के लिए सरकारी स्तर पर मना किया जा रहा है कि हीट-वेव जानलेवा हो सकती है।पशुओं की व्यवस्थाओं की बात कर सलाह दी जा रही है कि पशुओं को सुरक्षित रखें तो फिर गायों पर राजनीति करने वाले गौशालाओं की दुर्दशा पर आखिर चुप्पी क्यों साधे हैं ? बात साफ है कि इन्हें काम नहीं केवल राजनीति करनी है।गत दिवस कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो फैसले लिए हैं उनमें एक फैसला यह भी है कि प्रतिबंधित पशुओं यानी गौवंशों के काटे जाने की खबर नहीं आनी चाहिए।जानकारी होने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी लेकिन उन पर क्या कार्रवाई होगी जो सरकारी संरक्षण में काटने से भी ज्यादा बुरी दुर्गति,कष्ट व पीड़ा गौवंश गौशालाओं में झेल रहे हैं।


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